Tuesday, September 23, 2008

यूँ ही...उल्टा पुल्टा

मुझे एक और जिंदगी चाहिए

जो सिर्फ़ तुम्हारे साथ बिता सकूँ

शुरू से अंत तक...

जब मौत हर घड़ी मँडराती न रहे

सेकंड की टिक टिक के साथ...

हर वक्त अपने साथ ले चलने की धमकी लिए

मुझे एक और जिंदगी चाहिए

ताकि मैं देख सकूँ

जंगल में जाती वो पगडण्डी कहाँ पहुँचती है

ताकि एक बार उस टीले पर से चांदनी रात में उतर सकूँ

एक और जिंदगी

जिसमे मुझे चाय पीने की आदत हो

ताकि तुम्हारा कप छीन कर पी सकूँ

एक और जिंदगी

जिसमे मैं लड़का होऊं

ताकि जबरन किसी रिश्ते में बंधे बिना

मैं हमेशा तुम्हारी दोस्त बनी रह सकूँ.

19 comments:

जितेन्द़ भगत said...

ओह, अदभुत!!

एक और जिंदगी

जिसमे मुझे चाय पीने की आदत हो

ताकि तुम्हारा कप छीन कर पी सकूँ

एक और जिंदगी

जिसमे मैं लड़का होऊं

ताकि जबरन किसी रिश्ते में बंधे बिना

मैं हमेशा तुम्हारी दोस्त बनी रह सकूँ.

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

सार्थक कविता और परिपक्व भावनाएँ!

Udan Tashtari said...

वाह! बहुत सुन्दर.

डॉ .अनुराग said...

एक ओर जिंदगी
ताकि देख सकूँ
तुम्हारे साथ रहना कैसा है ?
एक ओर जिंदगी कि
उम्र के साठवे साल में भी
तुम मुझसे चिढ़ती नही हो.....

bas yaar ....tumhe padhte padhte yun hi kuch dimaag me aa gaya aor bas likh diya....

सुशील कुमार छौक्कर said...

आपके ये प्यारे ज़ज़्बात दिल को छू गए।
एक और जिंदगी
जिसमे मुझे चाय पीने की आदत हो
ताकि तुम्हारा कप छीन कर पी सकूँ

एक और जिंदगी
जिसमे मैं लड़का होऊं
ताकि जबरन किसी रिश्ते में बंधे बिना
मैं हमेशा तुम्हारी दोस्त बनी रह सकूँ.

अति सुन्दर।

मीत said...

Beautiful.

Prakash singh "Arsh" said...

bahot hi sundar bhav dala hai aapne apne kavita me....bahot hi umda likha hai aapne......sundar rachna ke liye badhai.....


regards

Tarun Goel said...

एक और जिंदगी
जिसमे मैं लड़का होऊं
ताकि जबरन किसी रिश्ते में बंधे बिना
मैं हमेशा तुम्हारी दोस्त बनी रह सकूँ.

Crude but true!! Nicely eritten

श्यामल सुमन said...

मुझे एक और जिंदगी चाहिए

अपने आप में खूबसूरत स्वप्न समेटे आपकी यह रचना प्यारी लगी।

जिन्दगी के भले दिन हैं कम ही तो क्या,
हसरतें हों बडी और लगन चाहिए।
दिल की चाहत ही ख्वाबों में ढलती सदा,
ऐसे ख्वाबों को धरती गगन चाहिए।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.

रौशन said...

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
वो दिल ही क्या जो इस तरह बेहिसाब ख्वाहिश न करे. bhavnayen सुंदर हो तो जो कहा जाए वो अपने आप सुंदर कविता हो जाता है

"VISHAL" said...

bhavpurna rachana

प्रदीप मानोरिया said...

शब्द सौन्दर्य से परिपूर्ण आपकी कविता अच्छी क्या बहुत अच्छी लगी आपका आगमन मेरा सौभाग्य है हार्दिक धन्यबाद आपका आगमन नियमित बनाए रखें मेरी नई रचना पढ़े
हिन्दी काव्य मंच: दिल की बीमारी

Piggy Little said...

marvellous. :)

bhoothnath said...

ताकि जबरन किसी रिश्ते में बंधे बिना

मैं हमेशा तुम्हारी दोस्त बनी रह सकूँ.
चलिए आपकी ये हसरत भी हमने पूरी कर दी.......सच.....

अविनाश said...

जब मौत हर घड़ी मँडराती न रहे

सेकंड की टिक टिक के साथ...

हर वक्त अपने साथ ले चलने की धमकी लिए

मुझे एक और जिंदगी चाहिए

MARKANDEY RAI said...

एक और जिंदगी

जिसमे मैं लड़का होऊ.

मुझे एक और जिंदगी चाहिए

ताकि मैं देख सकूँ.

आपकी यह रचना प्यारी लगी।

Rajat Narula said...

जिसमे मैं लड़का होऊं

ताकि जबरन किसी रिश्ते में बंधे बिना

मैं हमेशा तुम्हारी दोस्त बनी रह सकूँ.

Its just brilliant, your blog is a testimony of bath breaking creative writing...

vikash said...

very good, close to heart

***Punam*** said...

amazzing...