Monday, April 28, 2008

शायद

शायद
इस जिंदगी में
एक ऐसा दिन भी आएगा

जब हम एक दूसरे के साथ हँस सकेंगे
कुछ पुराने किस्से याद करके मैं तुम्हें चिढ़ा सकूंगी

कुछ पुराने गाने साथ में गा सकेंगे
शायद तुम्हारा सुर तब तक थोड़ा ठीक हो जाए

शायद बहुत सालों बाद कभी अकेले बैठोगे
तो मेरी किसी शरारत पे हँस सकोगे
और हो सकता है मुझे फ़ोन भी कर लो

या शायद ये भी हो सकता है
किसी दिन किसी दोस्त से पता चले
कि मेरा ऊपर से बुलावा आ गया था

और तुम्हें अफ़सोस हो...
यूं ताउम्र रूठे नहीं रहना चाहिए था...

12 comments:

मीत said...

कुछ पुराने गाने साथ में गा सकेंगे
शायद तुम्हारा सुर तब तक थोड़ा ठीक हो जाए

Great. In fact the whole thing !!

Faceless Maverick said...

क्या लिख दिया ?
रात के दूसरे छोर पर सुबह हमेशा धूप बिखरने को बेताब होती है.

Udan Tashtari said...

गहरी रचना है.

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

यह पंक्ति बहुत गहरे भाव लिए हुए है.. सुंदर रचना .. बधाई..

अभिषेक ओझा said...

और तुम्हें अफ़सोस हो...
यूं ताउम्र रूठे नहीं रहना चाहिए था.

आख़िर में दिल को छू गई ये पंक्तियाँ.

DR.ANURAG ARYA said...

शायद बहुत सालों बाद कभी अकेले बैठोगे
तो मेरी किसी शरारत पे हँस सकोगे
और हो सकता है मुझे फ़ोन भी कर लो
......
एक पकिस्तिनी शायर है परवीन शाकिर ...तुम्हे पढता हूँ तो उनकी याद आती है बस थोड़ा लफ्जों का इस्तेमाल ओर उर्दू के सही लफ्ज़ चुनना ......
पर एक ईमानदारी ओर बेबाकी है लिखने मे....एक शेर याद आया तुम्हे पद्के.....
"वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया
मगर उम्र भर हाथ मलते रहे "-कैफी आज़मी.
.

Fenridal said...

See Please Here

pallavi trivedi said...

bahut khoobsurat ehsaas bhari rachna...bahut achchi lagi.

कुमार विनोद said...

आपको पढ़कर गुलजार साहब की कही एक बात याद आ गई, एहसास गेंहू की फसल की तरह है जिसे पकने से पहले काटना चाहिए,एक किस्म के कच्चेपन के रहते...रोटियां अच्छी बनती है. इन कविताओं में भी एहसास का कुछ वैसा ही कच्चापन है...कमराए (पकने से पहले का कच्चापन) आम की तरह...मैंने ब्लॉग पर पसरे एक के बाद एक तमाम आम खा लिए...

जायके का विवरण अगली पोस्ट पर...

nadeem said...

बहतरीन रचना और ईमानदार कोशिश.

vinayprajapati said...

zindagii khoobsoorat aur ghamgeen bhii magar donon ka apana maza hai... maut donon se judaa hai aur gunaah bhii...

The guy sans voice said...

Madam!!! r u real????