Monday, October 05, 2009

हाथ की लकीरें


उसके हाथों की लकीरें
बिल्कुल मेरे हाथ की लकीरों जैसी थी...
जैसे खुदा ने हूबहू एक सी किस्मतें दी हों हमें

पर मेरी किस्मत में उसका हाथ नहीं था
न उसकी किस्मत में मेरा

कहीं लकीरों के हेर फेर में खुदा ने गलती कर दी थी
इसलिए उसके हाथ में मेरे नाम की लकीर नहीं थी
न मेरे हाथ में उसके नाम की

इसलिए एक होते हुए भी
हमारा इश्क जुदा था...हमारे इश्क को जुदा होना था

मगर जिंदगी के एक मोड़ पर
इन्तेजार करता मेरा हमसफ़र मुझे मिल गया

क्या मैं उम्मीद करूँ की उसे भी उसका हमसफ़र मिलेगा?

33 comments:

Mithilesh dubey said...

उम्दा रचना, पहली बार आपको ब्लोगावाणी पर देखा। ये बात तो साफ है कि आपने ये कविता लिखी है दिल से। किस्मत होती ही ऐसी है। उम्मीद पर ही दूनियाँ कायम है।

अनिल कान्त : said...

हाँ शायद लकीरों को बनाने वाले ने उसके लिए भी कोई मोड़ बना रखा हो

भरोसा रखो, यकीनन...

शाश्‍वत शेखर said...

ummeed to honi hi chahiye..bina ummeed ke jindagi kaisi.

महेन्द्र मिश्र said...

भावपूर्ण कविता आपने दिल से लिखी है... बधाई.

M VERMA said...

एहसास बहुत गहरे हो तो लकीरे खुद ब खुद बन जाती है.
बहुत अच्छी रचना

mehek said...

there is someone for everyone,mil jaaye yahi dua,bhawnao ki sunder lekir khichi hai.

Pankaj Upadhyay said...

वाह..उसकी लकीर तो अच्छी है ही की अभी तक उसके भले का ख्याल है.. मुहब्बत कितनी हसीन चीज़ होती है...

VIJAY TIWARI " KISLAY " said...

एक दम कहानी नुमा पद्य में अभिव्यक्ति
अच्छा लगा..

"क्या मैं उम्मीद करूँ की उसे भी उसका हमसफ़र मिलेगा? "
हमें आशावादी रहना ही चाहिए, और साथ ही सकारात्मक सोच के होने से निराशा का भाव प्रभावी नहीं हो पता .
- विजय

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा भावपूर्ण रचना.

रचना दीक्षित said...

ये हाथ की लकीरें हीं हैं जो उपर वाले के होने का अहसास कराती हैं
सुंदर अभिव्यक्ति
मेरा ब्लॉग भी देखें
rachanaravindra.blogspot.com

ओम आर्य said...

हाँ ,लकीरे ही नसीब होने का एहसास कराती है .......

Savita Khari said...

shi kha aapne ye lakire milane me kabhi-kabhi uper vala bhi mistake ker deta hoga..........bahut si yaade taja ker gyi aapki rachna .....bus aage kuch or na khe payungi!!!!!!!!!!!!!

Apoorv said...

इतनी कम पंक्तियों मे उस ’खास‘ फ़ीलिंग को कितने एन्गल्स से फ़्लैश किया है आपने..बहुत खूब..
हाँ मगर ताजिंदगी सारी लकीरें एक सी नही रहती हैं..लकीरें भी अपना मुकद्दर ले कर पैदा होती हैं..और टूटती-बिखरती रहती हैं..अपने एक्स्पीरिएन्स से बता रहा हूँ.

भंगार said...

अलग कुछ सोचना अपने में एक अलग बात है ...और कुछ आप ऐसा कर रहीं है

zindagi ki kalam se! said...

simply beautiful!

अभिषेक प्रसाद 'अवि' said...

Simply best... par hath ki lakiron mein kucch nahi hota... kismat hum khud banate hai...

waise simple words mein best rachna...

Jogi said...

wow ..beautiful one !!!

अलीम आज़मी said...

bahut khoobsurat andaaz hai aapka likhne ka .....hum to aapke kahir kwaah ho gaye .....sabhi ghazlein ek se badhkar ek hai .......bahut umdaa

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

bahut sunder bhaav ...

MUFLIS said...

मन की बात
शब्दों का विश्वास
किस्मत का साथ
...
बहुत अच्छी रचना

Prerna said...

intezaar, ummeed se hi jahaan hai..warna kuch nahi

त्रिपुरारि कुमार शर्मा said...

पता है,
आप हर दफ़ा मुझे कनफ़्यूजनात्मक स्थिति में पहूँचा देती हैं |

और

मुझे इस स्थिति में साँस लेना अच्छा लगता है |

मतलब,

कविता बहुत अच्छी लगी, पढ़ कर बहुत सुकून हासिल हुआ |

इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया !

Kulwant Happy said...

आपका माँ पर लिखा हुआ लेख भावविभोर कर गया। लेकिन आपने वहाँ पर टिप्पणी करने से रोक क्यों लगा दी है।

abhi said...

बहुत खूबसूरत रचना..

प्रवीण पाण्डेय said...

आपकी यह और कौतूहलवश पिछली कई पोस्ट पढ़ गया | जिस प्रकार आपने अपने आप को व्यक्त किया है, मैं आपके बारे में केवल दो बातें कह सकता हूँ | ईमानदारी और हिम्मत | यह बनाये रखिये | यह संवेदना के स्वर नहीं हैं, अपितु सम्मान के हैं |

Deepali Sangwan said...

bahut khoobsurat nazm kahi hai puja..
ultimate.. bahut acchi lagi..

Virendra Singh Chauhan said...

Kya likun!!!!!! samajh men nahin aa raha hai. Baar-Baar padhne ko man kar raha hai......................

Rahul Singh said...

पहली तीन पंक्तियां उबरने नहीं देतीं और उसके बाद आगे का बयां फीका-सा लगता है.

Rajat Narula said...

brilliant creation, a satire on god's way of planning our desitny and then playing with us through out the life...

Akhil said...

pooja ji
aapke blog par pahli baar ana hua..ek se badhkar ek rachnayen hain sabhi..dil ko chu lene wala lekhan hai aapka..seedhe aur meethe shabdon men baat dil me utar jaati hai..badhai sweekar karen..

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

bahut shandar rachna... mujhe mera hamsafar..kya use uska..kash aisa hota ki dono kahte mujhe mera hamsafar mil gaya

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

bahut shandar rachna... mujhe mera hamsafar..kya use uska..kash aisa hota ki dono kahte mujhe mera hamsafar mil gaya

Vaneet Nagpal said...

पूजा जी,
आपकी इस रचना "हाथ की लकीरें" को सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉग स्पोट डाट काम के "काव्य मंच" पेज स्थान दिया जा रहा है |