Wednesday, September 10, 2008

जहाँ चैन से मर जाएँ...

बहुत गुरुर है तुम्हें कि खुदा हो मेरे
इतनी मसरूफियत कि ख्वाब में भी आ नहीं सकते

तरसाओगे अपनी आवाज के एक कतरे को भी
खफा यूँ हो कि एक बार नाम लेकर बुला नहीं सकते

घर बदल लिया कि रास्ते बदल दिए तूने
कहाँ रहने लगे कि हम चाह कर भी जा नहीं सकते

अरसा बीता मगर साँस लेते हैं आज भी वो दिन
तू भी मानता है कि हम उन्हें जिन्दा दफना नहीं सकते

कैसे फुर्सत मिल जाती है तुझे नफरतों के लिए
इतनी छोटी है जिंदगी कि जी भर मुस्कुरा नहीं सकते

तेरी जिंदगी से बस एक कोने की गुज़ारिश है
जहाँ चैन से मर जायें कि कहीं और सुकूं पा नहीं सकते

12 comments:

!!अक्षय-मन!! said...

तेरी जिंदगी से बस एक कोने की गुज़ारिश है
जहाँ चैन से मर जायें कि कहीं और सुकूं पा नहीं सकते
WAH! BAHUT SUNDAR BAHUT UMDA LIKHA HAI......SUBHKAMNAAYE......
AKSHAYA-MANN

डॉ .अनुराग said...

अरे भाई इत्ता गुस्सा .....इसे पढ़कर याद आया जब हमें नया नया शौक हुआ था पढने का तब हमने कही से पढ़ा था... पता नही किसका लिखा हुआ है.....


तू मेरा खुदा है तुझे यही तो है गुमान
ले आज तुझे इंसान बनाये देता हूँ
मोम बनकर पिघल जायेगा तू
ले इतने चुम्बन लेता हूँ....

travel30 said...

तेरी जिंदगी से बस एक कोने की गुज़ारिश है
जहाँ चैन से मर जायें कि कहीं और सुकूं पा नहीं सकते

behad khoobsurat line... bahut acha likha pooja ji.. bahut hi pyara

तेरी जिंदगी से बस एक कोने की गुज़ारिश है
जहाँ चैन से मर जायें कि कहीं और सुकूं पा नहीं सकते

travel30 said...

New Post :
I don’t want to love you… but I do....

Udan Tashtari said...

ऐसी भी क्या उदासी!!!! रचना अच्छी है.

वीनस केसरी said...

ऐसी भी क्या नाराजगी ?

अच्छी कविता
अच्छे भाव

वीनस केसरी

pallavi trivedi said...

बहुत गुरुर है तुम्हें कि खुदा हो मेरे
इतनी मसरूफियत कि ख्वाब में भी आ नहीं सकते

bahut achchi rachna...

"अर्श" said...

अरसा बीता मगर साँस लेते हैं आज भी वो दिन
तू भी मानता है कि हम उन्हें जिन्दा दफना नहीं सकते,

puja aapki likhe is line me bahot hi parepkwata nazar aati hai bahot hi sundar likha hai aapne kafi gaharai hai aapke lekhan me .....sundar rachana ke liye badhai swikaren......

regards
Arsh

Tarun Goel said...

अरसा बीता मगर साँस लेते हैं आज भी वो दिन
तू भी मानता है कि हम उन्हें जिन्दा दफना नहीं सकते

I am reading all your poems one by one and it is amazing to read you!!

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

बहुत गुरुर है तुम्हें कि खुदा हो मेरे
इतनी मसरूफियत कि ख्वाब में भी आ नहीं सकते
और तुम्हें भी इतना क्या गुरूर....और ऐसी मसरूफियत.....कि मुझे बुला भी नहीं सकते.......सच बहुत ही अच्छा और स्मूथ लिखती हो आप.....

वर्तिका said...

naarazagi mein bhi itnaa pyaar....... :) bahut pyaari rachna

Anil Sai said...

आपका बुत बुत धन्यवाद